बुधवार, 9 दिसंबर 2009

आशियाँ


कुछ पत्थर हिन्दुओं ने चलाया

कुछ मुसलमानों ने

बेहतर होता

उससे

किसी

गरीब के लिए

एक आशियाँ बनाते।

3 टिप्‍पणियां:

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

बहुत सुन्दर कविता . बधाई ....

परमजीत सिहँ बाली ने कहा…

बहुत जोरदार व सटीक !!बधाई स्वीकारें।

http://anusamvedna.blogspot.com ने कहा…

चंद लाइनों में आप ने बहुत गहरी बात कहदी .....

सुंदर रचना .......