Abhayaism
सोमवार, 20 सितंबर 2010
इंसान
इंसान कुछ इस तरह से जिंदा है
मानो शिकायतों का पुलिंदा है
दिखता नहीं उसकी आँखों में सुकून
हर
वक़्त,
काम-पैसा-जुगाड़ का जूनून...
1 टिप्पणी:
माधव( Madhav)
ने कहा…
wah wah
20 सितंबर 2010 को 4:36 pm बजे
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
1 टिप्पणी:
wah wah
एक टिप्पणी भेजें