शुक्रवार, 28 अगस्त 2009

बेदर्द दर्द?


दर्द को भी अब दर्द होने लगा


दर्द ख़ुद ही मेरे घाव धोने लगा


दर्द के मारे हम तो बहुत रोये


अब दर्द ख़ुद मुझे छूकर रोने लगा।

शुक्रवार, 14 अगस्त 2009

शराफत


शराफत

इंसानों की कैसी ये शराफत है

झूठ की नींव पे खड़ी सच की इमारत है

जेब में है खून से सने खंजर

औ' जुबां पे इबादत है ............