मंगलवार, 2 दिसंबर 2008

सब माया है...




बचपन से ही बड़े बुजुर्गो के मुंह से सुनता था सब माया है लेकिन जेहन में एक चीज़ हमेशा सालती थी कि आख़िर ये माया क्या बला है? मैंने जो महसूस किया वह आपके सामने रख रहा हूँ ।


माया क्या है?
मेरी दृष्टि में ईश्वर को पाने में जो वस्तु आपके मार्ग की बाधा बनती है , वह माया है। भले ही वह हमारी तरह-तरह की वासनाएँ हों या भौतिक जीवन की हसरतें।
हमारी सर्वोच्च सोच ईश्वरीय सत्ता को पाना ही होना चाहिए लेकिन भौतिक जीवन में अपने विभिन्न कार्य करते हुए प्रत्येक कार्य ईश्वर के लिए कर रहे हैं यह भाव होना चाहिए।
मुझसे एक मित्र ने पूछा कि तुम इस उम्र में ही ये सब `बाबागीरी' क्यों कर रहे हो? मैंने उनसे कहा कि एक साधे सब सधे सब सधे सब जाए।
हम सदैव आनंद को खोजने का प्रयास करते रहते हैं। लेकिन कभी गंभीरता से सोचिये तो हमारा हर एक प्रयास इसीलिए और उसी दिशा में होता है जहाँ हमें सुख प्राप्त हो। कोई छोटे घर में रहता है, उसे बड़ा घर चाहिए। कोई छोटी कार के बदले बड़ी कार लेने कि फिराक में है। कोई ज्यादा पैसे कमाने के चक्कर में दिन रात एक किए हुए है।
मेरी दृष्टि में हम लोगों को इन सुखो कि बजाय आनंद पाने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि जहाँ सुख आएगा वहां दुःख भी आएगा। जहाँ दुःख होगा वहां सुख आएगा । इसलिए हमें आनंद खोजना चाहिए। आनंद सुख और दुःख के बीच के अवस्था है।
और वह आनंद तुम्हे ईश्वर में ही मिलेगा।
शेष फ़िर .........

2 टिप्‍पणियां:

Meenakshi Kandwal ने कहा…

जीवन को लेकर इस तरह की सोच आपको ज़रुर आगे ले जाएगी। जीवन ख़ुद में इतना दिलचस्प और जिज्ञासाओं से भरपूर है कि हर अनुभव और हर घटना रोमांचित करती है।

अमिताभ श्रीवास्तव ने कहा…

maya pr bahut bade star pr vyakhyan diya jaa sakta he..snkshipt me bs yahi ki maya..ishvar dvara rachit leela he so maya se dur nahi raha jaa sakta..maya me rah kar ishvar ko pana hi sukh ki aour gati he..
main esa samjhta hu ki aapke sukh, apki bhakti bhi ek maya he.