Abhayaism
सोमवार, 20 सितंबर 2010
इंसान
इंसान कुछ इस तरह से जिंदा है
मानो शिकायतों का पुलिंदा है
दिखता नहीं उसकी आँखों में सुकून
हर
वक़्त,
काम-पैसा-जुगाड़ का जूनून...
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