मंगलवार, 23 दिसंबर 2008

जय हिंद !!!



मुंबई के उपनगर बोरीवली से लोकल ट्रेन खुली। धीरे-धीरे ट्रेन पूरी रफ्तार पकड़ चुकी थी। दो स्टेशन बाद भीड़ काफी बढ़ चुकी थी। सुबह पीक आवर होने के कारण गोरेगांव स्टेशन तक धक्कामुक्की बढ़ने लगी थी। ट्रेन में बातचीत का दौर शुरू हुआ। टाइम पास के लिए बातें शुरू हो गयी। देश के लिए मर -मिटने वाले कमांडो की तारीफों के पुल बांधे जा रहे थे। पाकिस्तान को दस गालियाँ एक साथ मिल रही थी।


तभी उस भीड़ भरे डिब्बे में ८-१० हिंदुस्थानी सेना के जवान चढ़े। वर्दी में। पसीने में तर-बतर। उनके पास बहुत सारा सामान भी था। स्वाभाविक था डिब्बा फर्स्ट क्लास का था तो लोगों की भौहें तन गयी थी। फर्स्टक्लास के लोगों के कपड़ो की सलवटे जो ख़राब हो रही थीं। २-५ मिनट कोई कुछ नही बोला। फ़िर कुछ ने बोलना शुरू कर दिया। `ये फर्स्टक्लास का डिब्बा है ।' फ़िर सभी ने बोलना शुरू कर दिया। `नीचे उतरो -दूसरा डिब्बा पकडो।' `ये टाइम क्यों आए'। जैसी बातों से सेना के जवान `घायल' होने लगे थे। खैर , सांताक्रुज स्टेशन आते ही सारे जवान उतर गए। लेकिन जाते-जाते जवानों में से एक जवान बोला। धन्यवाद सब लोगों को आपने हम लोगों को १५ मिनट `सहा'। हम सीमा पर आपके लिए ही इससे भी कही ज्यादा `सहते' हैं। कोई बात नही। जय हिंद।।।


ट्रेन में सभी `फर्स्ट क्लास' वालो को अपनी वैचारिकी के `क्लास' का पता चल चुका था।

बुधवार, 17 दिसंबर 2008

हर शख्स...


जाने क्या

मुझसे ज़माना चाहता है

मेरा दिल तोड़कर

मुझे हँसाना चाहता है

जाने क्या बात है मेरे चेहरे में

हर शख्स

मुझे आज़माना चाहता है ......

सोमवार, 8 दिसंबर 2008

झुर्रियों के पीछे ...

उन बेटा-बेटियों के नाम जिन्होंने अपने माँ-बाप को एक बोझ समझा। जिन्होंने अपने पृथ्वी के साक्षात देवता का अपमान किया।
उन्हें एक चेतावनी ...
माँ बाप ने पैदा किया, होम कर दिया जीवन
बेटा बदला बेटी बदली, दिखा कमीनापन
दिखा कमीनापन , देखो शर्म न आयी
दो पैसे कमाते ही, अपनी औकात बताई
माँ-बाप के चरणों में है स्वर्ग की सीढ़ी
वरना देखो आती है तुम्हारी अगली पीढी।

गुरुवार, 4 दिसंबर 2008

हादसों ने पाला है


-हमने हर गम को खुशी में ढाला है ,

हमारा हर एक चलन निराला है,

जिन हादसों में मरते हैं लोग,

हमें तो उन हादसों ने पाला है

बुधवार, 3 दिसंबर 2008

आह ताज!


मेरे सात साल के बेटे ने

ताजमहल की तस्वीर बनाई

यमुना के तीर, सफेदी झलकाती

मर चुकी मोहब्बत की

दफ़न हुई तकदीर दिखाई

फ़िर होटल ताज की तस्वीर

उसने बिना देखे बना डाली

चमकते ताज के नीचे

खून से लथपथ-खौफनाक रात बना डाली

लेकिन गायब था उसमे से ताज का एक गुम्बद

पूछा तो बेटा बोला

पापा ताज तो जिंदा है लेकिन

ताज की इस हालत ने

देश के नेताओ की असलियत बता डाली

मंगलवार, 2 दिसंबर 2008

सब माया है...




बचपन से ही बड़े बुजुर्गो के मुंह से सुनता था सब माया है लेकिन जेहन में एक चीज़ हमेशा सालती थी कि आख़िर ये माया क्या बला है? मैंने जो महसूस किया वह आपके सामने रख रहा हूँ ।


माया क्या है?
मेरी दृष्टि में ईश्वर को पाने में जो वस्तु आपके मार्ग की बाधा बनती है , वह माया है। भले ही वह हमारी तरह-तरह की वासनाएँ हों या भौतिक जीवन की हसरतें।
हमारी सर्वोच्च सोच ईश्वरीय सत्ता को पाना ही होना चाहिए लेकिन भौतिक जीवन में अपने विभिन्न कार्य करते हुए प्रत्येक कार्य ईश्वर के लिए कर रहे हैं यह भाव होना चाहिए।
मुझसे एक मित्र ने पूछा कि तुम इस उम्र में ही ये सब `बाबागीरी' क्यों कर रहे हो? मैंने उनसे कहा कि एक साधे सब सधे सब सधे सब जाए।
हम सदैव आनंद को खोजने का प्रयास करते रहते हैं। लेकिन कभी गंभीरता से सोचिये तो हमारा हर एक प्रयास इसीलिए और उसी दिशा में होता है जहाँ हमें सुख प्राप्त हो। कोई छोटे घर में रहता है, उसे बड़ा घर चाहिए। कोई छोटी कार के बदले बड़ी कार लेने कि फिराक में है। कोई ज्यादा पैसे कमाने के चक्कर में दिन रात एक किए हुए है।
मेरी दृष्टि में हम लोगों को इन सुखो कि बजाय आनंद पाने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि जहाँ सुख आएगा वहां दुःख भी आएगा। जहाँ दुःख होगा वहां सुख आएगा । इसलिए हमें आनंद खोजना चाहिए। आनंद सुख और दुःख के बीच के अवस्था है।
और वह आनंद तुम्हे ईश्वर में ही मिलेगा।
शेष फ़िर .........