रविवार, 30 नवंबर 2008

तीन सूत्र


जीवन के तीन महत्वपूर्ण सूत्र दे रहा हूँ। अपने आप को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रखना हो तो ये तीन बातें बहुत उपयोगी साबित होंगी।

१ ) संगीत

२) सेहत

और ३) साहित्य।

१ ) संगीत सुनने से हमारा मस्तिष्क हल्का हो जाता है। आपको जब भी समय मिले अपना पसंदीदा गाना अवश्य सुनें।

२) अच्छी सेहत भी जरुरी है। इसलिए थोड़ा सा व्यायाम रोज जरुर करें। सेहत जब ठीक रहेगी तो मन स्वस्थ रहेगा। योग की क्रिया जैसे प्राणायाम आदि जरुर करें। इसके अलावा जितना हो सके व्यायाम करें।

३) साहित्य दिमाग को पॉलिश करती है। अखबार आदि तो पढ़ना ही चाहिए ताकि हमारे आसपास क्या घट रहा है उससे हम वाकिफ रहें। अपने पसंदीदा विषय की किताबें भी पढ़नी चाहिए। ये तीन बहुत ही आसान से सूत्र है अपने आप को अपडेट रखने के लिए और फिट रखने के लिए। और हाँ , दिमाग की बत्ती जलाये रखने के लिए। धन्यवाद। आज इतना ही ...

शास्त्र वचन


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कर खुदी को बुलंद इतना ...


शुक्रवार, 28 नवंबर 2008

ये कैसा मातम है ?

मुंबई ने कई आतंकी हमले झेले है लेकिन मुम्बईकरों का जूनून कभी ख़त्म नही होता। हर हमाले के बाद मुंबई और मजबूत होकर उभरती है। जब इस घटना से द्रवित हुआ तो एक कविता बन पडी पेश कर रहा हूँ ...
ये कैसा मातम है...
खामोश हुई जुबां, दिल उदास
बीमार हौसले, उम्मीदें कमजोर
और आँखे हुई नम हैं
मेरे जिस्म में मचा कैसा मातम है
कल तक दिल हंसता था
अब हँसते लबों में दर्द झलकता है
चमकते सूरज के पीछे भी तम है
मेरे जिस्म में मचा कैसा मातम है
जज्बा बूढा हो चला है सरकार सा
दिल्ली की शिखंडी हरकतों से
परेशां तुम हो, और हम हैं
मेरे जिस्म में मचा कैसा मातम है
जिंदगी हमें जिसने दी है
वही जान ले ले, गम नही
पर फिदायीनी गोली से निकला दम है
मेरे जिस्म में मचा कैसा मातम है
आज टूटे है, कल फ़िर जुडेंगे `अभय'
काफिरों से हम डरते नही
खैरखाह है कई, फ़िर भी कम है
मेरे जिस्म में मचा कैसा मातम है
बीमार हौसले, उम्मीदें कमजोर
और आँखे हुई नम हैं
मेरे जिस्म में मचा कैसा मातम है